शनिवार, 26 दिसंबर 2009

निःशब्द ....

इस पुरे हफ्ते बहुत सी घटनाए घटित हुई.१९ साल की नींद की बात मीडिया भी जागा ,१९ साल तक एक प्रशासनिक अधिकारी हैवान बनकर एक परिवार को सताता रहा तब तक किसी की नज़र नहीं पड़ी पर जब सजा हुई तो पूरा भारत उनके साथ हो लिया.दुनिया भर के समाज सेवी संगठन उनके साथ हो लिए.जब वह डी.जी पी.बना तब भी किसी का उसकी तरफ ध्यान नहीं गया.इस प्रकरण मे राजनितिक संरक्षण भी सामने आ रहा है अब आने के बाद उस समय उस प्रदेश के सभी राजनीतिग्य शुरू हो गए है की इसमें हमारा कोई हाथ नहीं है,सभी इसमें अपनी राजनीति तलाश रहे है.यह प्रकरण हमारे ''पवित्र'' संविधान पर एक तमाचा है.अब इस प्रकरण को मीडिया ने सामने तो ला दिया पर कब तक मीडिया भी इस पर अपनी रील खर्च करेगा हम भारतीयों को तो नयापन चाहिए होता है थोड़े दिन इसका हल्ला होगा फिर धीरे धीरे कर यह सब शांत हो जाएगा और जब भी सुनवाई या सजा होगी तब ये जिन्न फिर बहार आ जायेगा.उस हैवान की मुस्कुराहट ने ही उसे डुबो दिया यदि वो सजा के बाद बाहर आकर न मुस्कुराता तो शायद इतना हंगामा न होता.
मेरी भगवान से यही प्रार्थना है की जो दुःख तनाव व पीड़ा गिरहोत्रा परिवार ने झेली है वो हैवान भी उसे झेले वो भो जेल मे,भगवान करे वह अपने आखरी दिनों मे जेल की काली कोठरी मे बंद अपना समय बिताये.यह भी दूर का एक सपना है क्योकि जो आदमी १९ साल तक किसी परिवार को वही के प्रशासन से परेशान कर सकता है तो जेल मे तो उसे घर से भी अच्छी सुविधा प्राप्त होगी.इस मामले मे मेरे हिसाब से उन पुलिस वालो का कोई दोष नहीं है जिन्होंने गिरहोत्रा परिवार को परेशान किया उन्होंने तो वही किया जो उनके मालिक ने कहा नहीं करते तो वो लोग भी अपनी जान से हाथ धो बैठते.
आशा है की अब इन्साफ देर से नहीं आएगाऔर उस हैवान को सजा भगवान की अदालत मे भी होगी
जय हिंद....

सोमवार, 14 दिसंबर 2009

हमारी भूमि

पहले अलग देश अब अलग राज्य बाद मे अलग जिला और उसके भी बाद मे अलग तहसील.शायद यही कहानी हमारे भारत की दिख रही है.भारत सरकार के जल्दबाजी मे लिए गए फैसले का परिणाम हमे भुगतना पढ़ रहा है या हो सकता है आगे भी भुगतना पड़ेगा.सभी दल जो राज्य की मांग कर रहे है वो अपनी अलग भूमि चाहते है या उनमे से कुछ है जो ये कह रहे है की बड़े राज्य की अपेक्षा छोटे राज्य ज्यादा तेज़ी से विकास करेंगे.इस कथन का जीता जागता उदाहरण है झारखण्ड, जहा कोड़ा के कारनामे बने और वो बहार आये.विकास की यदि बात करे तो छत्तीसगढ़ से अच्छा कोई उदाहरण नहीं है,सर्वाधिक नक्सल प्रभावित राज्य है,३ रूपये किलो चावल से मजदूर वर्ग मे निकम्मापन व कामचोरी मे बेतहाशा वृद्धि हुई है.
केंद्र सरकार द्वारा रात को लिया गया फैसला हमे और अन्धकार मे भेजते जा रहा है कई और राजनितिक पार्टिया अपनी मांग को लेकर भूख हड़ताल मे बैठने वाली है सभी को अपनी ज़मीं और अपना आसमान चाहिए वो ये नहीं सोचते की इससे कितना नुक्सान हो सकता है.कोई भी ये नहीं सोचता की हमारे देश का क्या होगा सब अपनी अपनी राजनितिक रोटिया सेक रहे है और आग हमारे दिलो पर लग रही है .रातो रात कोई फैसला नहीं होता यदि भूख हड़ताल ओदनी ही थी तो आश्वासन भी दिया जा सकता है जब जनता को हज़ारो आश्वासन देने के बाद भूल जाते है तो एक और सही थोड़े दिनों बाद यह सब ठंडा हो जाता और अगले लो.स, चुनाव के समय फिर भूसे मे चिंगारी फेक देते.छोटे राज्य कहने से ही मुझे वहा की पार्टियों की कुर्सी के प्रति आस्था नज़र आती है.कोई भी पार्टी अपने भाषण की शुरुआत विकास के लिए छोटा राज्य से नहीं करती.
सिर्फ छोटा राज्य होने से ही विकास नहीं होता वहा पर खुद के बल मे राज्य चलने की सम्भावना भी रहनी चाहिए.एक आग को लगाकर हमारी सरकार ने पूरा घर जलाने का काम किया है अब यह देखना रोचक होगा की उस आग मे कौन कौन बचता है और कौन जलता है
जय हिंद.....

गुरुवार, 10 दिसंबर 2009

''AWARDS FOR INDIAN OF THE YEAR..... !!!!''

वर्ष का अंत हो रहा है काफी कुछ उपलब्धि व बहुत कुछ नुक्सान के साथ ये वर्ष हमसे विदाई ले रहा है और इसी विदाई के साथ पुरस्कारों की शुरुआत भी हो गयी है आजकल मनोरंजन चेनलो के साथ साथ समाचार बेचने वालो ने भी पुरस्कार देना शुरू कर दिया है.इन लोगो के द्वारा किसी को पुरस्कार दिया जाए न दिय जाए परन्तु ''भारतीय सेना'' को ज़रूर पुरस्कार दिया जाता है क्या हमारी सेना पुरस्कार के लायक है?हमारी सेना इन सबसे ऊपर है उसे किसी पुरस्कार की आवश्यकता नहीं है.ज़बरदस्ती लोगो की भावनाओ के साथ खेलकर ये पुरस्कार वितरित किये जाते है और अछि खासी कमी भी हो जाती है कितने चेनल वाले ऐसे है जो इस कमाई को दान देते है.कई पुरस्कार तो सिर्फ लोगो को याद दिलने के लिए दिए जाते है और इन समारोहों मे हमारी सरकार के कई बड़े मंत्री उपस्थिति दर्ज करवाते है.मेरे राज्य के मुख्यमंत्री को भी एक चेनल वालो ने उम्मीदवार बनाया है उनको जितने के लिए यहाँ पर बाकायदा टी,वी. व रेडियो पर लोगो से एस एम एस करने की अपील की जा रही है इस अपील से चेनल वालो को कितना फायदा होगा ये तो सोचने की बात है.हमे ये कभी नहीं भूलना चाहिए की भारत का हर निवासी ''INDIAN OF THE YEAR'' है .ये हमारी भूल है की हम किसी एक व्यक्ति को ही चुनते है.
जय हिंद....

मंगलवार, 8 दिसंबर 2009

चमचाई का नया नमूना

कल राहुल बाबा की चमचाई राहुल बाबा को ही महँगी पड़ गयी.उ.प्र. कांग्रेस प्रमुख का बयां देखकर तो मुझे काफी हँसी आई उन्होंने ने तो और चमचो की तरह चमचाई की यही पर यहाँ तो अपना चम्मच गले में उतर गया और कर गया पूरा गला खराब.कल राहुल गाँधी का दौरा आज उनके लिए बड़ा सिरदर्द लाया पायलट पर दबाव डालकर जबरन अँधेरे व झाड़ वाली जगह पर अपना हेलीकाप्टर उतरवाने का मामला तूल पकड़ गया वह भी उनके ही एक कम दिमाग नेता के कारण उनके शब्द तो उन्ही के लिए घातक साबित हो गए बहुगुणा जी ने सोचा की चमचई करके शायद केंद्र में स्थान मिल जाएगा पर अपना तीर तो अपने ही को लग गया पर राहुल बाबा के बयानों को देखकर तो लगता है की गलती न पायलट की थी और न ही उनकी ये तो रीता जी थी जिन्होंने गर्रिब व भोले लोगो के लिए दिए एक बयान मे कहा की''० विसिबिलिटी होते हुए भी जनता की किया गया वादा पूरा करने के लिए एक नेता ने पायलट को कहकर अपना हेलीकाप्टर उतरवा दिया'' अब इस चमचाई का रीता जी को क्या इनाम मिलता है ये देखना तो बहुत मजेदार रहेगा .
एक दिन यही चमचे कांग्रेस को ले डूबेगी और गांधी परिवार द्वारा कड़ी की गयी कांग्रेस उन्ही के ही लोगो द्वारा गिरा दी जायेगी.पहले भी गाँधी परिवार के कई सदस्यों ने पार्टी में आये है पर राहुल बाबा के नाम की जो चमचाई देखने को मिली वह तो अदभूत है गाँधी परिवार के किसी भी सदस्य को इतने चमचे नहीं मिले होंगे जितने की राहुल बाबा को.यदि जल्द ही इन चमचो को सजा नहीं दी गयी तो कांग्रेस की बरबादी को कोई नहीं रोक सकता
एक और बात जो मे बताना चाहता हु वो ये की मेरे राज्य मे निगम व पंचायत चुनाव हो रहे है.टिकट के लिए यहाँ की कांग्रेस मे रोज मारपीट हो रही है कल ही एक महिला अपनी दावेदारी को लेकर आत्महत्या तक करने की बात पर उतर आई. उसका आरोप था की वह अपने वार्ड की सही दावेदार है, उसने १.५ लिटर की बोतल मे मिटटी तेल लिया उसकी भी मात्रा भी लगभग उसके तल के आसपास थी थोडा सा मिट्टी तेल लेकर उसने आत्महत्या करने की बात कही, पर बाद मे मामला निपटा लिया गया और उसे टिकट भी नहीं मिला.छात्र राजनीति मे अक्सर एक नारा लगता जय''अभी तो ली अंगड़ाई है आगे बहुत लड़ाई है''यहाँ इस नारे का एक आधुनिकतम रूप सामने आया''अभी तो ली अंगड़ाई है कल परसों पिटाई है'' यह नारा भी कांग्रेसियों के तरफ से आया है .यहाँ कांग्रेस एक वार्ड से उम्मीदवार का नाम तय करते है और अगले ही दिन उसके ही विरोध में कांग्रेसी सैकड़ो कांग्रेसी आ जाते है. दावेदारी को लेकर कांग्रेस में बहुत मारामारी है आज ही जब में अपने कॉलेज से लौट रहा था तो देखा की कांग्रेस के वरिष्ट नेता ''स्व.पंडित श्यामाचरण शुक्ल'' के पुत्र ''अमितेश शुक्ल'' के घर दावेदारों की भीड़ थी मैंने कभी भी उनके घर का दरवाजा बंद नहीं देखा पर आज उनके घर का दरवाजा बंद था.भाजपा मे यह सब कम है यहाँ पर जो दावेदार तय होता है उसका विरोध कम जगह देखने को मिलता है या होता ही नहीं है.भाजपा ने अपनी सूचि दो दिन पहले जारी कर दी है पर कांग्रेस की सूचि का अत पता नहीं है.
भगवान बचाए ऐसे राजनीतिज्ञों से......
जय हिंद.......

सोमवार, 30 नवंबर 2009

श्रद्धांजली......

कल मैंने टी.वी. पर एक कार्यक्रम देखा.यह कार्यक्रम दिल्ली में हो रहा था.मुंबई मे मारे गए लोगो के लिए यह कार्यक्रम था जिसमे माया नगरी के कई लोग भी शामिल थे.इस कार्यक्रम को देखकर तो मुझे काफी लज्जा महसूस हुई कार्यक्रम में उपस्थित लोगो ने उन शहीदों और वहा मरे लोगो का मज़ाक उड़ाया.जब सानिया मिर्ज़ा आई तब वहा पर काफी हल्ला मच गया सानिया ने भी ''श्रधान्जली सभा'' में मुस्कुरा कर इसका जवाब दिया और फिर अपना भाषण एक अभिनय के रूप में प्रस्तुत किया.इसके पहले भी अम्बिका सोनी व शीला दीक्षित ने भी हसकर सभा का प्रारंभ किया.अब बारी थी ''किंग खान'' की,पहले तो रिहर्सल के समय हस कर सब किया पर जब बोलने की बारी आई तो एकदम गम्भीर तरीके से अपना पक्ष रखा उनका तो पेशा ही यही है.इनमेभी कुछ लोग थे जिन्होंने अपने आपको सही मायने में प्रस्तुत किया और उनको सुनकर ऐसा लगा की नहीं इन्हें आतंकी हमले से बहुत तकलीफ हुई है ये थे ''अभिनव बिंद्रा'' और इंडियन एक्सप्रेस के ग्रुप एडिटर मुझे इनका नाम याद नहीं आ रहा .ये वो लोग है जो प्रसिद्ध है और भि कई थे जिन्होंने वहा पर अपना दुःख ज़ाहिर किया.हालाकि मैंने ये कार्क्रम आधे घंटे तक ही देखा उसके बाद तो मेरा दिल बैठ गया मुझे ये समझ मे नहीं आया की मे एक श्रद्धांजली सभा में हु या एक ''कोंसर्ट'' में .में इन सभी की देश के प्रति भावना को लेकर आशंकित नहीं हु पर इनका रव्विया जो मुझे वहा दिखा उससे मुझे बहुत दुःख हुआ.वो एक ऐसी जगह थी जहा पर आप हसकर भी लोगो को एक होने का सन्देश दे सकते थे पर वहा तो सिर्फ अभिनय हुआ वो भी आधे घंटे में मैंने इतना देखा यदि पूरा देखता तो न जाने क्या क्या और दिखाई पड़ता .
इन हमलो के बाद हमने भी कोई कम पाप नहीं किये है.इन हमलो मे १९ रक्षाकर्मी की मृत्यु हुई थी उसमे भी हमने सिर्फ ४ या ५ को याद किया बाकी तो सब अनजान ही रह गए इसमें सबसे बड़ा हाथ ''मीडिया'' का है.इन्होने सिर्फ मुंबई पुलिस के बड़े अफसरों की शाहदत को सलाम किया और बाकी को भूल गये .और इनमे भी कई लोग ऐसे है जिन्होंने एक आम आदमी होते हुए भी अपनी जान की बाज़ी लगा दी और स्वर्गवासी हो गए.काश इन्हें भी हम याद कर लेते या इनकी कहानी भी हम जान लेते तो इनकी जान की कीमत वसूल हो जाती.
जय हिंद.....

शुक्रवार, 27 नवंबर 2009

समझ ....!!!

कल का दिन काला दिवस था इस दिवस को ''कवर'' करने के लिए भारत भर के समाचार चेनलो में युद्ध चिद गया था हमारी संवेदना दुसरे चेनलो से ज्यादा है ऐसादिखने मै कोई कोर कसार नहीं छोड़ी जैसे की मैंने पहले लिखा था की वायलिन की डरावनी आवाजों के साथ २१इन्च के टीवी पर बमुश्किल १०इन्च में कुछ देखते है उसमे भी उन १०इंच में कुछ न कुछ लिखा होता है पर हुआ इसका एकदम उलट इन्होने ने तो वायलिन की नर्म आवाजों के साथ लोगो को रोते हुए दिखाया और इनके साथ साथ उन लोगो की भावनाओ को भी रुलाया जो इन्हें देख रहे थे मैंने तो एस एम् एस के ज़रिये लोगो तक एक सन्देश प्रचारित कर दिया था की ऐसे किसी भी ''रिपोर्ट'' को न देखे ये सिर्फ भावनाओ के साथ खेलकर पैसा कमाना चाहते है अब जो मेरे दोस्तों ने किया वो मेरे दोस्त ही जाने.पर एक बाट की तसल्ली हो गयी की कम से कम समाचार चेनलो को ये तो समझ आया की लोग वायलिन कीडरावनी आवाज़ नहीं बल्कि नर्म आवाज़ लोग सुनना चाहते है.मुंबई हमलो को मीडिया कितने दिन याद रखता है या याद रखने देता है ये तो मीडिया ही जाने ज्यादा से ज्यादा ५ साल उसके बाद धीरे धीरे ये लोग इन हमलो के बारे में बताना कम कर देंगे और १० साल होते तक ये तो बंद ही हो जायेगा इसका एक जीता जागता उदाहरण है ९३ मुंबई धमाका.
कल का दिन तो सभी के लिए ''कुबेर के खजाने में नहाने'' का दिन था सभी समाचार चेनलो व् मोबाइल कम्पनियों ने जी भरकर पैसे कमाए होंगे लोगो की संवेदनाओ के साथ खेलकर धन कमाने का नया ''आईडिया'' है ये .में भी इसमें फस गया औए मैंने भी अपने दो दोस्तों को एस एम् एस कर दिया एक तो मेरे ही मोबाइल पर आया था और उसे मैंने ओने दोस्त को फोरवर्ड कर दिया तब मुझे समझ में आया की ये तो पूरा खेल है .पर मुझे लगता है की एक दिन ऐसा ज़रूर आएगा जब हमारी मीडिया भी समझदार हो जाएगी और हम भी न्यूज़ देखेंगे न की बकवास.
जय हिंद....

बुधवार, 25 नवंबर 2009

कल पैसे कमाने और लोगो को फिर बुरी यादो में भेजने का दिन है.......

कल का दिन हमारे इतिहास का सबसे भयावह दिन है.हमारे लिए किसी काले दिवस से कम नही.अखबारों और टी.वी.चनलो के द्वरा किए गए नित नई खोजो से तो यही लगता है की गलती तो किसी की भी नही थी उन्होंने ही यहाँ आकर गलती कर दी.उनको तो सीधे जाना था दिल्ली वहा पर यदि हुआ होता तो अभी तक पाकिस्तान पर हमारा कब्ज़ा होता.ये तो थी जो हुआ होप्ता उसकी बातें पर जो हो गया है उसके बारे मई भी थोड़ा सा और जान लेते है.खबरों के अनुसार तात्कालिक गृहमंत्री ने मुंबई के बारे मई राज्य सरकार को ७ बार चेतावनी दी थी खुफिया विभाग ने ही करीब करीब इतनी ही बार चेतावनी दी थी पर राज्य सरकार ने इस पर कोई अमल नही किया .इस भूल की वजह से २०० क लगभग जाने गई ६० घंटे तक हम अपने ही घर में बंधक बने थे.हमारे प्रशासन का यह एक और निष्क्रिय चेहरा सामने आ गया और उसके बाद आरोपों का दौर शुरू हो गया अभी तो यह हल्ला काफ़ी दिनों तक चलेगा फिर धीरे धीरे हम इसे भिओ भूला देंगे .आख़िर हम कब तक ऐसे हमलो पर जवाब देते रहेब्गे और कब तक हम अपने सगे संबंधियों की जान गवाते रहेंगे और उससे भी भयानक कब तक हमारे नेता इस पर राजनीति करते रहेंगे अभी भी मुंबई में जहा भी हमले हुए वहा पर सुरक्षा का नामो निशान नही है पुलिस क अधिकारी बैठे तो रह्त्र है पर किसी संदिग्ध की तरफ़ उनका ध्यान नही रहता.पता नही कब तक हम ऐसे बेबस और लाचार रहेंगे। कल ही मैंने एक खबरिया चेनल पर पुलिस की हमलो के वक्त हुई बातो की रिकार्डिंग सुनी उसे सुन कर तो ऐसा लगा की जिस पुलिस को हम भारत की सबसे अच्छी पुलिस होने का दर्जा देते है वो यो नासमझो की पुलिस निकली कंट्रोल रूम में कोई व्यक्ति सही जानकारी नही दे रहा था और जब जानकारी मिली तो समझने वाले गलत समझे.
अब इन हमलो के होने के बाद जो खबरिया चेनलो ने दिखाया वो तो हद की भी हद हो गई २१इन्च के टी.वी। पर मुस्किल से १०इन्च साफ़ साफ़ दिख रहा रहा बाकी पुरा लिखा हुआ या बार बार दिखने वाले दृश्यों से भरा था. सभी तरफ़ से यही दिखाया की कैसे उन्होंने हमारे लोगो को मारा कैसे हमारे लोगो ने उन्हें मारा.अब यो जैसे उनके लिए पैसे कमाने का मौसम आ गया एस एम् एस से लोगो के मन को रुलाना और फिर उस्सी से पैसे कमाना २१इन्च के टी.वी। पर चारो ओर से तस्वीरों पर लिखना भयानक वायलिन की खतरनाक आवाज़े और एक खतरनाक या सहमी हुई आवाज़ के द्वारा पुरी घटना का वर्णन यही रह गया है खबरिया चनलो पर ये लोग क्यो नही समझते की इससे किसी का मानसिक सनुलन खो सकता है इन भयानक हमलो में जिन्होंने अपने लोगो को खोया है वो तो जीते जी ये सब देखकर मर जायेंगे. ये हमला हमारी हार था,इस हार ने हमारी कारगिल पर जीत को भुला दिया.आज तक किसी ने भी यह स्वीकार नही किया की ये हमारी गलती के कारण हुआ जब तक हममे स्वीकार की प्रवृत्ति नही आएगी हमपर हमले होते रहेंगे.
जय हिंद ....

बुधवार, 28 अक्टूबर 2009

मुखौटा दिखा रहे है माओवादी......

सर्वप्रथम में उन लोगो से क्षमा मांगता हु जिनको मेरी लिखी पसंद है और मैंने लिखना बंद कर दिया था.क्योंकि मेरी भी एक जिद थी की जब तक कोई मेरे ब्लॉग पर टिपण्णी नही करेगा मई अपनी उंगलिया की बोर्ड पर नही दौड़आऊंगा.अब जब टिप्पणी काफी पहले हो गई थी पर मैवो देख न सका और आज मै फिर अपनी उंगलिया हिन्दी मै की बोर्ड पर दौड़ा रहा हु।
कई घटनाये घाट गई जैसे नक्सली हमले, महंगाई वृद्धि,जसवंत जी का निष्कासन, चुनाव इत्यादि...... परन्तु सबसे दुखद घटना मेरे हिसाब से जम्मू व कश्मीर क मुख्यमंत्री श्री उमार अब्दुल्लाह का इस्तीफा देना था यह हमारी राजनीति का कला दिन था भगवान् का लाख लाख शुक्र है की वो अब अपना काम आराम से कर रहे है भगवान उनको बुरी नीयत और नज़र दोनों से बचाए।
पर हम आज मे जीते है कल इसी समय ४०० के करीब लोगो की जान खतरे मे थी और हमेशा की तरह हमारे मंत्रीगण राजनीति कर रहे थे वो तो मूवादी ओना मुखौटा दिखने आए थे तो गनीमत है वरना कल तो विनाश का नया अध्याय प्रारम्भ होता।
जबसे भारत व नक्सल प्रभावित राज्यों ने हल्ला मचाया है की अब नक्सलियों को मुहतोड़ जव्वाब देंगे तब से नक्सली हमारा ही मुह तोड़ रहे है। हमेशा की तरह सरकार की कछुआ गति से होने वाला काम नक्सलियों को taiiyari का पुरा मौका दे रहे है। और बयां पे बयां आ रहे है जैसे ''अब वक्त हो गया है की उन लोगो को मुह तोड़ जवाब दिया जाए''और ''हम अपने लोगो पर आक्रमण नही करेंगे'' अब यही सुनना रह गया था कौन से अपने लोग वाही जो निर्दोष आदिवासी नेताओ नागरिको व पुलिस तथा सेना के जवानो ki hatya kar r ahe hai . yadi inhe apne logkahte hai to unka kya jo hatya kar dete hai aur unhe sazphansi k roop mai hoti hai vo bhi to hamare apne hai unhe saza kyo inhe kyo nahi. yah sab hamari kachua chaal va durdarshita na hone ka natija hai .ab to samay haath se nikl chuka hai jab sarkaar ne aar paar ki ladai ka melaan kiya to ye haal hai sahi jab ladai hogi to.....................
hme ye katai nahi bhulna chahiye ki ye log deshdrohi se kam nahi hai inke kaaran hamari jantaa ka 900 crore swaha ho gaya ya hone valla hai maaovadiyo ne na vikaas hone diya aur na hi vo aisa nahi hone dena chahte hai
आज ट्रेन रुकवाई है कल हवाई जहाज पर कब्जा करेंगे और हम देखते रहेंगे मे छत्तीसगढ़ निवासी हु और यहाँ पर जवान आ चुके है वे अभी जंगल मे रहने का अभ्यास कर रहे हैऔर जो जंगल मे है वो नक्सलियों के साथ साथ बीमारियों से भी लड़ रहे है कल ही ४ जवानो को हेलीकॉप्टर से राजधानी रायपुर लाया गया क्योकि उन्हें मलेरिया हो गया था.राज्य सरकार और दुसरे गैर सरकारी sangthano के पास इनकी सुरक्षा का कोई प्रबध नही दिख रहा है
हम नक्सलियों की मानव शक्ति को आसानी से ख़त्म कर सकते है पर उनकी दिमागी सोच और विचारधारा को फैलने से रोकना बहुत कठिन है.पिछले साल भर से यही सुन रहा हु की अब बहुत हो गया अब हम इन्हे नही बख्शेंगे पर अब हालत ये है की वो हम नही बख्श रहे है.पहले यहाँ फाॅर्स बरसात मे आने वाली थी, फिर हुआ की बरसात के बाद ,फिर हुआ की दिवाली के बाद बी.एस .ऍफ़.भी आएगी, फिर हुआ की nvamber के aakhri सप्ताह मे, अब हुआ है की द्सेम्बेर के पहले सप्ताह मे और फाॅर्स आएगी। हलाकि अभी आइ.टी .बी पि. के जवान आगये है गनीमत है आ तो गए अब देखे बाकी कब आयेंगे
अंत मे यही की शायद अब मे अपने राज्य मे विकास की गंगा बहते देख सकता हु ????
कुछ तकनीकी समस्या की वजह से अंग्रेज़ी मे भी टाइप हो गया है कृपया इसके लिए मुझे क्षमा करे
जय हिंद .....

शुक्रवार, 24 जुलाई 2009

कसब को फासी क्यो

मुंबई हमले में पकड़े गए एक मात्र आतंकी कसाब को सभी फासी देने के लिए कह रहे है पर क्या हमने ये सोचा है की इस फासी से कसब की सजा एक ख़त्म हो जायेगी .निश्चित ही कसब का अंत हो जाएगा पर उन लोगो का क्या जिन्होने इन हमलो में अपनों की जान गवाई वे तो अभी तक इस भयानक सच को झेल रहे है.यदि कोई मुझसे पूछे तो कसब को फासी देना हमारे देश की सबसे बड़ी भूल होगी.उसने हमारे बहादुर सिपाहियों को एक झटके में मार कर अपना कम कर देते है और अब वही कसाब फासी की मांग कर रहा है और साथ में ये भी सुनने को आया है की यदि उसे फासी मिल जाए तो उसके मुजाहिदीन होने का मकसद पुरा हो जाएगा .इस आतंकी हमले ने कम से कम सरकार को तो जगाया ही साथ ही हमे भी सोचने पर मजबूर किया की क्या हम सुरक्षित है .उस आतंकी ने न जाने कितनी जान ली और अब बस फासी देकर हम उसकी इच्छा पुरी कर रहे है.उसे फासी कटाई नही देनी चाहिए क्योकि वो हमारा गुनाहगार है और हम उसकी इच्छा कभी पुरी नही कर सकते हम उसे एक झटके में मारकर उसके गुनाहों को माफ़ कर देंगे उसे ताउम्र जेल की चारदीवारी में रखकर उसे ये अहसास दिलाएंगे की बिना अपनों के जीना क्या होता है .हम उसके मकसद को अभी पुरा न होने दे ऐसी ही कोशिश होनी चाहिए नही तो ऐसे कई हमले भारत में होंगे.वो एक मुजाहिदीन होने का पुरा करना चाहता है और हम उसे ये फासी देकर पुरा करने दे रहे है हम उसे उसके मकसद में safal होने मे sahayta कर रहे है.शायद मेरी ये बात किसी को bji पसंद न आए पर एक बार ये सोचकर देखिये की क्या ksaab जैसे आतंकी का यही aant होना चाहिए.......ekdam shant
जय hind ....

गुरुवार, 23 जुलाई 2009

ग्रहण का असर

कल सूर्यग्रहण था और उससे भी पहले से उसके असर को हमारे टेलीविजन वाले उसके असर के बारे में बताने लगे और शायद हमारी जनता के राष्ट्रपति श्री ''ऐ.पी .जे .अब्दुल कलम आजाद'' पर ग्रहण का असर बहुत पहले ही पढ़ चुका था। ९ जुल को जो कुछ भी हुआ वह हमारे देश के लिए भुत ही दुर्भाग्यपूर्ण था। हम कब तक झुके रहेंगे और सब कुछ सहते रहेंगे हमारे मंत्रियो को यह बात मालूम थी फिर भी उस कम्पनी को सिर्फ़ एक नोटिस थमा दिया गनीमत है की यह ख़बर मीडिया में आ गई वरना हमारा हमारी ही धरती में अपमान हो गया होता और हम हमेशा की ही तरह देखते रहते। अब जब हमारे कुछ सांसदों ने उस कम्पनी के लिए संसद में सिर्फ़ ये सुझाव दिया की क्यो न उस कम्पनी को भारत में प्रतिबंधित कर दे तो कम्पनी की बचाव मुद्रा पर आ गई और कलम साहब से माफ़ी मांग ली ।
अब दूसरी परिस्थिति में हमारे प्रधानमंत्री ने मिस्त्र में साझा बयां जारी कर हमारे देश को और चिंता में धकेल दिया है। उस बयान के साथ साथ हमारी विदेश निति को भी सत्यानाश करवा दिया वो भी अमेरिका जैसे देश के लिए अब वो हमरे सैनिक ठिकानो पर बेरोकटोक देख सकता है.पकिस्तान को भी हमने साझा बयां में जो कुछ भी परोसा है उससे उसने हमारी पुरी दुनिया में किरकिरी करने के लिए बैठे बिठाये एक नया मसला दे दिया। हमने पाक हाथ दोस्ती के लिए हाथ आगे बढाया अब वह हमारे कंधे पर ही चढ़ गया है। आगे क्या हो क्या पता ????????
जय हिंद ....

रविवार, 19 जुलाई 2009

मायावती

मायावती जी अपना भाषण या प्रेस नोट या और जो कुछ भी जो वो पड़ती है उसे कौन लिखकर देता है?
अभी हाल मई जो कुछ भी हुआ वः किसी भी देश की सबसे निचली प्रवृत्ति है। २००० करोड़ के तीर्थ बनवाना वो भी चौक व् च्व्राहो पर अपने बुत लगवाना यह सब एक घटिया राज नितिग्य की पहचान है.दुनिया मे ऐसा कौन सा तीर्थ है जो २००० करोड़ से बना है और वह भी चौक चोराहो पर .और वाही गुंडाराज या कहे मायावती राज ही वहा की जनता को मिलना यह कैसी सरकार है जो जनता की ही दुतगति कर रही है.भगवन बचे ऐसे लोगो से।
मायावती जी अपनी बात को लिखकर लाकर क्यो बताती है?
किसी के पास इन प्रश्नों का उत्तर है?
जय हिंद

अभी तक का हाल

आज नक्सली हमले को पुरा एक हफ्ता बीत गया। अभी तक सरकार की ओर से सिवाय मंत्रालय के ऐ.सी.वाले कमरों मई हुई बैठको के आलावा कुछ नही हुआ यहाँ घोषणा हुई की एक वर्ष में नक्सलियों का सफाया कर देंगे पर अभी तक जो भी हुआ है उससे तो यही लगता है की उनकी जड़ तो हिली भी नही है बल्कि और मजबूत हो गई है और अपनी ही सरकार की जड़ टूटने को है। अब तो स्थानीय मीडिया भी कुछ नही कह रहा सभी चुप बैठे है।
मेरे दो चाचा सेना में है एक को छाती मे एक बार चार गोलिया लग चुकी है मुझे पता तब कैसा दर्द और दुःख होता है जब आपका अपना कोई इस प्रकार की घटना से दो चार होता है सौभाग्य से वह अभी भी सेना मे है और स्वस्थ है। मेरे कहने का मतलब यह है जब कोई पुलिसवाला ''मरता'' है तो दुःख सिर्फ़ उसे ही क्यो होता है जो उसको जानते है उसे क्यो नही जिनकी सुराषा मे दिन रात जागता है.आज र हमले के एक हफ्ते बाद हम फिर वाही पहुच चुके है जहा हमला होने से पहले थे.माइकल जैक्सन'' की मृत्यु होती है तो पुरा भारत दुःख के समंदर मे गोते लगता है और जब उसी भारतवासी के क्षेत्र के थाने का कोई पुलिसवाला ''मरता'' है तब?
अब पता नही आगे क्या होगा शायद १५या२० वर्षो मे मै भी अपने घर के पास की ''नक्सली चोकी ''में इंसाफ मांगने जाऊँगा... मै छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रहता हु
जय हिंद

सोमवार, 13 जुलाई 2009

नक्सली हमला

कल हमारे राज्य का सबसे बड़ा नक्सली हमला हुआ। फिर वही नेताऒ की नेतागिरी वो भी गिरी हुई,''हम नक्सलियों को मुह तोड़ जवाब देंगे''। यही वाकया हर नक्सली हमले के बाद सत्ता पक्ष से और''सरकार को नैतिकता के नाते इस्तीफा दे देना चाहिए'' यह बयान सत्ता विपक्ष की तरफ़ से आता है । दोनों पक्ष अपनी बात पर अडिग तो कभी नही रहते.कल हमने अपने 38 वीर वीर सपूतो को खो दिया यह सब हमरे पुलिस विभाग की नाकामी और केन्द्र से समन्वय न होने के कारन हुआ। हम कम से कम यह तो स्वीकार करते है की हमारी पुलिस नक्सलियों से मुकाबला करने मे असमर्थ है ,और हम केन्द्र से मदद की सम्भावना या कहे आशा करते है पर केन्द्र प्रत्येक वर्ष पैर पसार रहे लाल रंग को रोकने मई हमारे राज्य की मदद करने को तैयार ही नही है.जब छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ था तब यह सिर्फ़ बस्तर मे ही था पर अब यह हमारे राज्य की राजधानी तक पहुच चुका है .जब तक हमारे नेताओ को नक्सली वारदातों का अहसास नही होता तब तक नक्सली समस्या का हल असंभव है ।
आज नक्सली हमारे देश के ६०% वनों मे फैल चुके है। जिस प्रकार लालगढ़ मे केन्द्र ने मदाद भेजी उसी प्रकार हमारे राज्य मे भी सबसे अधिक केन्द्रीय फाॅर्स की जरूरत है देश के मध्य भाग मे होने के कारण हम दिन ब दिन नक्सलियों से घिरते जा रहे है । यह समस्या किसी एक राज्य की नही अपितु पुरे देश की यदि हमने इस पर अभी काबू नही पाया तो भविष्य मे यह विकराल रूप धारण कर लेगी और तब हम चाहकर भी इसे काबू मे नही कर पायेंगे। अभी भी काफी देर हो गई है पर
''जब जागो तब सवेरा''
जय हिंद.

शनिवार, 11 जुलाई 2009

बिहार में इंसाफ का नया तरीका

कल हमने इंसाफ पाने का नया तरीका इजत किया। निश्चित ही यह computar के अविष्कार के जैसा ही उपयोगी है पर उन अमीरों के लिए नही जो खाना भी छूरी चम्मच से खाते है। यह तरीका सिर्फ़ ganv का garib आदमी ही अपना सकता है । kyonki vahi आज के insaf से खुश नही है। यह तरीका है अपने आपको bum से baandhkar aatmhatya कर लेना। मैंने इस baare में pahle ही सोचा था की एक न एक दिन ऐसा होगा पर इतनी जल्दी होगा ये मैंने कभी नही सोचा था। खैर जो भी है बस अब हमे ऐसे apratyashit ghatnao के लिए taiiyar rahna होगा क्योंकि भविष्य मे ऐसी ghatnaye रोज़ हो सकती है और हम सिर्फ़ देखेंगे कभी भी उस garib besahara के परिवार के बारे मे किसी bhitv chenal मे नही आएगा। एक बात अच्छी हुई की इस tarike से शायद इंसाफ garibo के लिए to कम से कम थोड़ा जल्दी होगा।
जय hind ...

सोमवार, 6 जुलाई 2009

बजट

आज भारत का आम बजट पेश हो गया.मैंने अभी पुरी तरह से bajat देखा नही पर जहा तक देखा वहा तक पर्यावरण से सम्बंधित कुछ भी नही दिखा.मुझे ऐसा लग रहा है की इस बार भी हमारे पर्यावरण की फ़िक्र नही है.हमारी धरती गर्म हो रही है और हमारे वित्त मंत्रीयो को मिसकी भनक तक नही है.हमारे नेताओ का दिमाग ठंडा हो रहा है और धरता तपते जा रही है.इस बजट मई भी वाही किसी गरीब को न समझ मई आने वाले आंकडे जैसे की जीडीपी ६.७%,भारी भरकम पैसा,इत्यादि कथन सुनने को मिले."हम २०१४ तक गरीबी आधी करेंगे "मतलब गरीबी को ख़त्म नही करना है बस आधी करना है.ऐसे बजट का क्या अर्थ जिसे को गाव मई रहने वाले मजदूर न समझ सके और ये कहना की ये बजट आम आदमी का है क्या यह सही है???
जय हिंद.

शनिवार, 4 जुलाई 2009

jabalpur

mai yaha 3 din se hu aur mai jaha bhi gaya vaha par sirf gandagi dekhne ko mili yaha tak ki maa narmda ko bhi gandagi ne apne aavesh mai le liya hai.aakhir hum kab sudhrenge hum ye kyo nahi samjhte ki humar jivan inhi nadiyo se hai naki nadiya humse.hum dhire dhire apne hi jivan ko samapti ki or le ja rahe hai.maine kabhi sapne mai bhi nahi socha tha ki nramda k nadi k ek tarah se udgam sthal ko ham itna ganda kar denge.
ishwar un sabhi ko budhi de jinhone itne grinit kary kiye hai aur unko bhi jinhone aaj tak is or dhyan nahi diya.
DHANYVAD