गुरुवार, 23 जुलाई 2009

ग्रहण का असर

कल सूर्यग्रहण था और उससे भी पहले से उसके असर को हमारे टेलीविजन वाले उसके असर के बारे में बताने लगे और शायद हमारी जनता के राष्ट्रपति श्री ''ऐ.पी .जे .अब्दुल कलम आजाद'' पर ग्रहण का असर बहुत पहले ही पढ़ चुका था। ९ जुल को जो कुछ भी हुआ वह हमारे देश के लिए भुत ही दुर्भाग्यपूर्ण था। हम कब तक झुके रहेंगे और सब कुछ सहते रहेंगे हमारे मंत्रियो को यह बात मालूम थी फिर भी उस कम्पनी को सिर्फ़ एक नोटिस थमा दिया गनीमत है की यह ख़बर मीडिया में आ गई वरना हमारा हमारी ही धरती में अपमान हो गया होता और हम हमेशा की ही तरह देखते रहते। अब जब हमारे कुछ सांसदों ने उस कम्पनी के लिए संसद में सिर्फ़ ये सुझाव दिया की क्यो न उस कम्पनी को भारत में प्रतिबंधित कर दे तो कम्पनी की बचाव मुद्रा पर आ गई और कलम साहब से माफ़ी मांग ली ।
अब दूसरी परिस्थिति में हमारे प्रधानमंत्री ने मिस्त्र में साझा बयां जारी कर हमारे देश को और चिंता में धकेल दिया है। उस बयान के साथ साथ हमारी विदेश निति को भी सत्यानाश करवा दिया वो भी अमेरिका जैसे देश के लिए अब वो हमरे सैनिक ठिकानो पर बेरोकटोक देख सकता है.पकिस्तान को भी हमने साझा बयां में जो कुछ भी परोसा है उससे उसने हमारी पुरी दुनिया में किरकिरी करने के लिए बैठे बिठाये एक नया मसला दे दिया। हमने पाक हाथ दोस्ती के लिए हाथ आगे बढाया अब वह हमारे कंधे पर ही चढ़ गया है। आगे क्या हो क्या पता ????????
जय हिंद ....

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