रविवार, 19 जुलाई 2009

अभी तक का हाल

आज नक्सली हमले को पुरा एक हफ्ता बीत गया। अभी तक सरकार की ओर से सिवाय मंत्रालय के ऐ.सी.वाले कमरों मई हुई बैठको के आलावा कुछ नही हुआ यहाँ घोषणा हुई की एक वर्ष में नक्सलियों का सफाया कर देंगे पर अभी तक जो भी हुआ है उससे तो यही लगता है की उनकी जड़ तो हिली भी नही है बल्कि और मजबूत हो गई है और अपनी ही सरकार की जड़ टूटने को है। अब तो स्थानीय मीडिया भी कुछ नही कह रहा सभी चुप बैठे है।
मेरे दो चाचा सेना में है एक को छाती मे एक बार चार गोलिया लग चुकी है मुझे पता तब कैसा दर्द और दुःख होता है जब आपका अपना कोई इस प्रकार की घटना से दो चार होता है सौभाग्य से वह अभी भी सेना मे है और स्वस्थ है। मेरे कहने का मतलब यह है जब कोई पुलिसवाला ''मरता'' है तो दुःख सिर्फ़ उसे ही क्यो होता है जो उसको जानते है उसे क्यो नही जिनकी सुराषा मे दिन रात जागता है.आज र हमले के एक हफ्ते बाद हम फिर वाही पहुच चुके है जहा हमला होने से पहले थे.माइकल जैक्सन'' की मृत्यु होती है तो पुरा भारत दुःख के समंदर मे गोते लगता है और जब उसी भारतवासी के क्षेत्र के थाने का कोई पुलिसवाला ''मरता'' है तब?
अब पता नही आगे क्या होगा शायद १५या२० वर्षो मे मै भी अपने घर के पास की ''नक्सली चोकी ''में इंसाफ मांगने जाऊँगा... मै छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रहता हु
जय हिंद

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