सोमवार, 30 नवंबर 2009

श्रद्धांजली......

कल मैंने टी.वी. पर एक कार्यक्रम देखा.यह कार्यक्रम दिल्ली में हो रहा था.मुंबई मे मारे गए लोगो के लिए यह कार्यक्रम था जिसमे माया नगरी के कई लोग भी शामिल थे.इस कार्यक्रम को देखकर तो मुझे काफी लज्जा महसूस हुई कार्यक्रम में उपस्थित लोगो ने उन शहीदों और वहा मरे लोगो का मज़ाक उड़ाया.जब सानिया मिर्ज़ा आई तब वहा पर काफी हल्ला मच गया सानिया ने भी ''श्रधान्जली सभा'' में मुस्कुरा कर इसका जवाब दिया और फिर अपना भाषण एक अभिनय के रूप में प्रस्तुत किया.इसके पहले भी अम्बिका सोनी व शीला दीक्षित ने भी हसकर सभा का प्रारंभ किया.अब बारी थी ''किंग खान'' की,पहले तो रिहर्सल के समय हस कर सब किया पर जब बोलने की बारी आई तो एकदम गम्भीर तरीके से अपना पक्ष रखा उनका तो पेशा ही यही है.इनमेभी कुछ लोग थे जिन्होंने अपने आपको सही मायने में प्रस्तुत किया और उनको सुनकर ऐसा लगा की नहीं इन्हें आतंकी हमले से बहुत तकलीफ हुई है ये थे ''अभिनव बिंद्रा'' और इंडियन एक्सप्रेस के ग्रुप एडिटर मुझे इनका नाम याद नहीं आ रहा .ये वो लोग है जो प्रसिद्ध है और भि कई थे जिन्होंने वहा पर अपना दुःख ज़ाहिर किया.हालाकि मैंने ये कार्क्रम आधे घंटे तक ही देखा उसके बाद तो मेरा दिल बैठ गया मुझे ये समझ मे नहीं आया की मे एक श्रद्धांजली सभा में हु या एक ''कोंसर्ट'' में .में इन सभी की देश के प्रति भावना को लेकर आशंकित नहीं हु पर इनका रव्विया जो मुझे वहा दिखा उससे मुझे बहुत दुःख हुआ.वो एक ऐसी जगह थी जहा पर आप हसकर भी लोगो को एक होने का सन्देश दे सकते थे पर वहा तो सिर्फ अभिनय हुआ वो भी आधे घंटे में मैंने इतना देखा यदि पूरा देखता तो न जाने क्या क्या और दिखाई पड़ता .
इन हमलो के बाद हमने भी कोई कम पाप नहीं किये है.इन हमलो मे १९ रक्षाकर्मी की मृत्यु हुई थी उसमे भी हमने सिर्फ ४ या ५ को याद किया बाकी तो सब अनजान ही रह गए इसमें सबसे बड़ा हाथ ''मीडिया'' का है.इन्होने सिर्फ मुंबई पुलिस के बड़े अफसरों की शाहदत को सलाम किया और बाकी को भूल गये .और इनमे भी कई लोग ऐसे है जिन्होंने एक आम आदमी होते हुए भी अपनी जान की बाज़ी लगा दी और स्वर्गवासी हो गए.काश इन्हें भी हम याद कर लेते या इनकी कहानी भी हम जान लेते तो इनकी जान की कीमत वसूल हो जाती.
जय हिंद.....

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