शुक्रवार, 24 जुलाई 2009

कसब को फासी क्यो

मुंबई हमले में पकड़े गए एक मात्र आतंकी कसाब को सभी फासी देने के लिए कह रहे है पर क्या हमने ये सोचा है की इस फासी से कसब की सजा एक ख़त्म हो जायेगी .निश्चित ही कसब का अंत हो जाएगा पर उन लोगो का क्या जिन्होने इन हमलो में अपनों की जान गवाई वे तो अभी तक इस भयानक सच को झेल रहे है.यदि कोई मुझसे पूछे तो कसब को फासी देना हमारे देश की सबसे बड़ी भूल होगी.उसने हमारे बहादुर सिपाहियों को एक झटके में मार कर अपना कम कर देते है और अब वही कसाब फासी की मांग कर रहा है और साथ में ये भी सुनने को आया है की यदि उसे फासी मिल जाए तो उसके मुजाहिदीन होने का मकसद पुरा हो जाएगा .इस आतंकी हमले ने कम से कम सरकार को तो जगाया ही साथ ही हमे भी सोचने पर मजबूर किया की क्या हम सुरक्षित है .उस आतंकी ने न जाने कितनी जान ली और अब बस फासी देकर हम उसकी इच्छा पुरी कर रहे है.उसे फासी कटाई नही देनी चाहिए क्योकि वो हमारा गुनाहगार है और हम उसकी इच्छा कभी पुरी नही कर सकते हम उसे एक झटके में मारकर उसके गुनाहों को माफ़ कर देंगे उसे ताउम्र जेल की चारदीवारी में रखकर उसे ये अहसास दिलाएंगे की बिना अपनों के जीना क्या होता है .हम उसके मकसद को अभी पुरा न होने दे ऐसी ही कोशिश होनी चाहिए नही तो ऐसे कई हमले भारत में होंगे.वो एक मुजाहिदीन होने का पुरा करना चाहता है और हम उसे ये फासी देकर पुरा करने दे रहे है हम उसे उसके मकसद में safal होने मे sahayta कर रहे है.शायद मेरी ये बात किसी को bji पसंद न आए पर एक बार ये सोचकर देखिये की क्या ksaab जैसे आतंकी का यही aant होना चाहिए.......ekdam shant
जय hind ....

गुरुवार, 23 जुलाई 2009

ग्रहण का असर

कल सूर्यग्रहण था और उससे भी पहले से उसके असर को हमारे टेलीविजन वाले उसके असर के बारे में बताने लगे और शायद हमारी जनता के राष्ट्रपति श्री ''ऐ.पी .जे .अब्दुल कलम आजाद'' पर ग्रहण का असर बहुत पहले ही पढ़ चुका था। ९ जुल को जो कुछ भी हुआ वह हमारे देश के लिए भुत ही दुर्भाग्यपूर्ण था। हम कब तक झुके रहेंगे और सब कुछ सहते रहेंगे हमारे मंत्रियो को यह बात मालूम थी फिर भी उस कम्पनी को सिर्फ़ एक नोटिस थमा दिया गनीमत है की यह ख़बर मीडिया में आ गई वरना हमारा हमारी ही धरती में अपमान हो गया होता और हम हमेशा की ही तरह देखते रहते। अब जब हमारे कुछ सांसदों ने उस कम्पनी के लिए संसद में सिर्फ़ ये सुझाव दिया की क्यो न उस कम्पनी को भारत में प्रतिबंधित कर दे तो कम्पनी की बचाव मुद्रा पर आ गई और कलम साहब से माफ़ी मांग ली ।
अब दूसरी परिस्थिति में हमारे प्रधानमंत्री ने मिस्त्र में साझा बयां जारी कर हमारे देश को और चिंता में धकेल दिया है। उस बयान के साथ साथ हमारी विदेश निति को भी सत्यानाश करवा दिया वो भी अमेरिका जैसे देश के लिए अब वो हमरे सैनिक ठिकानो पर बेरोकटोक देख सकता है.पकिस्तान को भी हमने साझा बयां में जो कुछ भी परोसा है उससे उसने हमारी पुरी दुनिया में किरकिरी करने के लिए बैठे बिठाये एक नया मसला दे दिया। हमने पाक हाथ दोस्ती के लिए हाथ आगे बढाया अब वह हमारे कंधे पर ही चढ़ गया है। आगे क्या हो क्या पता ????????
जय हिंद ....

रविवार, 19 जुलाई 2009

मायावती

मायावती जी अपना भाषण या प्रेस नोट या और जो कुछ भी जो वो पड़ती है उसे कौन लिखकर देता है?
अभी हाल मई जो कुछ भी हुआ वः किसी भी देश की सबसे निचली प्रवृत्ति है। २००० करोड़ के तीर्थ बनवाना वो भी चौक व् च्व्राहो पर अपने बुत लगवाना यह सब एक घटिया राज नितिग्य की पहचान है.दुनिया मे ऐसा कौन सा तीर्थ है जो २००० करोड़ से बना है और वह भी चौक चोराहो पर .और वाही गुंडाराज या कहे मायावती राज ही वहा की जनता को मिलना यह कैसी सरकार है जो जनता की ही दुतगति कर रही है.भगवन बचे ऐसे लोगो से।
मायावती जी अपनी बात को लिखकर लाकर क्यो बताती है?
किसी के पास इन प्रश्नों का उत्तर है?
जय हिंद

अभी तक का हाल

आज नक्सली हमले को पुरा एक हफ्ता बीत गया। अभी तक सरकार की ओर से सिवाय मंत्रालय के ऐ.सी.वाले कमरों मई हुई बैठको के आलावा कुछ नही हुआ यहाँ घोषणा हुई की एक वर्ष में नक्सलियों का सफाया कर देंगे पर अभी तक जो भी हुआ है उससे तो यही लगता है की उनकी जड़ तो हिली भी नही है बल्कि और मजबूत हो गई है और अपनी ही सरकार की जड़ टूटने को है। अब तो स्थानीय मीडिया भी कुछ नही कह रहा सभी चुप बैठे है।
मेरे दो चाचा सेना में है एक को छाती मे एक बार चार गोलिया लग चुकी है मुझे पता तब कैसा दर्द और दुःख होता है जब आपका अपना कोई इस प्रकार की घटना से दो चार होता है सौभाग्य से वह अभी भी सेना मे है और स्वस्थ है। मेरे कहने का मतलब यह है जब कोई पुलिसवाला ''मरता'' है तो दुःख सिर्फ़ उसे ही क्यो होता है जो उसको जानते है उसे क्यो नही जिनकी सुराषा मे दिन रात जागता है.आज र हमले के एक हफ्ते बाद हम फिर वाही पहुच चुके है जहा हमला होने से पहले थे.माइकल जैक्सन'' की मृत्यु होती है तो पुरा भारत दुःख के समंदर मे गोते लगता है और जब उसी भारतवासी के क्षेत्र के थाने का कोई पुलिसवाला ''मरता'' है तब?
अब पता नही आगे क्या होगा शायद १५या२० वर्षो मे मै भी अपने घर के पास की ''नक्सली चोकी ''में इंसाफ मांगने जाऊँगा... मै छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रहता हु
जय हिंद

सोमवार, 13 जुलाई 2009

नक्सली हमला

कल हमारे राज्य का सबसे बड़ा नक्सली हमला हुआ। फिर वही नेताऒ की नेतागिरी वो भी गिरी हुई,''हम नक्सलियों को मुह तोड़ जवाब देंगे''। यही वाकया हर नक्सली हमले के बाद सत्ता पक्ष से और''सरकार को नैतिकता के नाते इस्तीफा दे देना चाहिए'' यह बयान सत्ता विपक्ष की तरफ़ से आता है । दोनों पक्ष अपनी बात पर अडिग तो कभी नही रहते.कल हमने अपने 38 वीर वीर सपूतो को खो दिया यह सब हमरे पुलिस विभाग की नाकामी और केन्द्र से समन्वय न होने के कारन हुआ। हम कम से कम यह तो स्वीकार करते है की हमारी पुलिस नक्सलियों से मुकाबला करने मे असमर्थ है ,और हम केन्द्र से मदद की सम्भावना या कहे आशा करते है पर केन्द्र प्रत्येक वर्ष पैर पसार रहे लाल रंग को रोकने मई हमारे राज्य की मदद करने को तैयार ही नही है.जब छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ था तब यह सिर्फ़ बस्तर मे ही था पर अब यह हमारे राज्य की राजधानी तक पहुच चुका है .जब तक हमारे नेताओ को नक्सली वारदातों का अहसास नही होता तब तक नक्सली समस्या का हल असंभव है ।
आज नक्सली हमारे देश के ६०% वनों मे फैल चुके है। जिस प्रकार लालगढ़ मे केन्द्र ने मदाद भेजी उसी प्रकार हमारे राज्य मे भी सबसे अधिक केन्द्रीय फाॅर्स की जरूरत है देश के मध्य भाग मे होने के कारण हम दिन ब दिन नक्सलियों से घिरते जा रहे है । यह समस्या किसी एक राज्य की नही अपितु पुरे देश की यदि हमने इस पर अभी काबू नही पाया तो भविष्य मे यह विकराल रूप धारण कर लेगी और तब हम चाहकर भी इसे काबू मे नही कर पायेंगे। अभी भी काफी देर हो गई है पर
''जब जागो तब सवेरा''
जय हिंद.

शनिवार, 11 जुलाई 2009

बिहार में इंसाफ का नया तरीका

कल हमने इंसाफ पाने का नया तरीका इजत किया। निश्चित ही यह computar के अविष्कार के जैसा ही उपयोगी है पर उन अमीरों के लिए नही जो खाना भी छूरी चम्मच से खाते है। यह तरीका सिर्फ़ ganv का garib आदमी ही अपना सकता है । kyonki vahi आज के insaf से खुश नही है। यह तरीका है अपने आपको bum से baandhkar aatmhatya कर लेना। मैंने इस baare में pahle ही सोचा था की एक न एक दिन ऐसा होगा पर इतनी जल्दी होगा ये मैंने कभी नही सोचा था। खैर जो भी है बस अब हमे ऐसे apratyashit ghatnao के लिए taiiyar rahna होगा क्योंकि भविष्य मे ऐसी ghatnaye रोज़ हो सकती है और हम सिर्फ़ देखेंगे कभी भी उस garib besahara के परिवार के बारे मे किसी bhitv chenal मे नही आएगा। एक बात अच्छी हुई की इस tarike से शायद इंसाफ garibo के लिए to कम से कम थोड़ा जल्दी होगा।
जय hind ...

सोमवार, 6 जुलाई 2009

बजट

आज भारत का आम बजट पेश हो गया.मैंने अभी पुरी तरह से bajat देखा नही पर जहा तक देखा वहा तक पर्यावरण से सम्बंधित कुछ भी नही दिखा.मुझे ऐसा लग रहा है की इस बार भी हमारे पर्यावरण की फ़िक्र नही है.हमारी धरती गर्म हो रही है और हमारे वित्त मंत्रीयो को मिसकी भनक तक नही है.हमारे नेताओ का दिमाग ठंडा हो रहा है और धरता तपते जा रही है.इस बजट मई भी वाही किसी गरीब को न समझ मई आने वाले आंकडे जैसे की जीडीपी ६.७%,भारी भरकम पैसा,इत्यादि कथन सुनने को मिले."हम २०१४ तक गरीबी आधी करेंगे "मतलब गरीबी को ख़त्म नही करना है बस आधी करना है.ऐसे बजट का क्या अर्थ जिसे को गाव मई रहने वाले मजदूर न समझ सके और ये कहना की ये बजट आम आदमी का है क्या यह सही है???
जय हिंद.

शनिवार, 4 जुलाई 2009

jabalpur

mai yaha 3 din se hu aur mai jaha bhi gaya vaha par sirf gandagi dekhne ko mili yaha tak ki maa narmda ko bhi gandagi ne apne aavesh mai le liya hai.aakhir hum kab sudhrenge hum ye kyo nahi samjhte ki humar jivan inhi nadiyo se hai naki nadiya humse.hum dhire dhire apne hi jivan ko samapti ki or le ja rahe hai.maine kabhi sapne mai bhi nahi socha tha ki nramda k nadi k ek tarah se udgam sthal ko ham itna ganda kar denge.
ishwar un sabhi ko budhi de jinhone itne grinit kary kiye hai aur unko bhi jinhone aaj tak is or dhyan nahi diya.
DHANYVAD