कल का दिन हमारे इतिहास का सबसे भयावह दिन है.हमारे लिए किसी काले दिवस से कम नही.अखबारों और टी.वी.चनलो के द्वरा किए गए नित नई खोजो से तो यही लगता है की गलती तो किसी की भी नही थी उन्होंने ही यहाँ आकर गलती कर दी.उनको तो सीधे जाना था दिल्ली वहा पर यदि हुआ होता तो अभी तक पाकिस्तान पर हमारा कब्ज़ा होता.ये तो थी जो हुआ होप्ता उसकी बातें पर जो हो गया है उसके बारे मई भी थोड़ा सा और जान लेते है.खबरों के अनुसार तात्कालिक गृहमंत्री ने मुंबई के बारे मई राज्य सरकार को ७ बार चेतावनी दी थी खुफिया विभाग ने ही करीब करीब इतनी ही बार चेतावनी दी थी पर राज्य सरकार ने इस पर कोई अमल नही किया .इस भूल की वजह से २०० क लगभग जाने गई ६० घंटे तक हम अपने ही घर में बंधक बने थे.हमारे प्रशासन का यह एक और निष्क्रिय चेहरा सामने आ गया और उसके बाद आरोपों का दौर शुरू हो गया अभी तो यह हल्ला काफ़ी दिनों तक चलेगा फिर धीरे धीरे हम इसे भिओ भूला देंगे .आख़िर हम कब तक ऐसे हमलो पर जवाब देते रहेब्गे और कब तक हम अपने सगे संबंधियों की जान गवाते रहेंगे और उससे भी भयानक कब तक हमारे नेता इस पर राजनीति करते रहेंगे अभी भी मुंबई में जहा भी हमले हुए वहा पर सुरक्षा का नामो निशान नही है पुलिस क अधिकारी बैठे तो रह्त्र है पर किसी संदिग्ध की तरफ़ उनका ध्यान नही रहता.पता नही कब तक हम ऐसे बेबस और लाचार रहेंगे। कल ही मैंने एक खबरिया चेनल पर पुलिस की हमलो के वक्त हुई बातो की रिकार्डिंग सुनी उसे सुन कर तो ऐसा लगा की जिस पुलिस को हम भारत की सबसे अच्छी पुलिस होने का दर्जा देते है वो यो नासमझो की पुलिस निकली कंट्रोल रूम में कोई व्यक्ति सही जानकारी नही दे रहा था और जब जानकारी मिली तो समझने वाले गलत समझे.
अब इन हमलो के होने के बाद जो खबरिया चेनलो ने दिखाया वो तो हद की भी हद हो गई २१इन्च के टी.वी। पर मुस्किल से १०इन्च साफ़ साफ़ दिख रहा रहा बाकी पुरा लिखा हुआ या बार बार दिखने वाले दृश्यों से भरा था. सभी तरफ़ से यही दिखाया की कैसे उन्होंने हमारे लोगो को मारा कैसे हमारे लोगो ने उन्हें मारा.अब यो जैसे उनके लिए पैसे कमाने का मौसम आ गया एस एम् एस से लोगो के मन को रुलाना और फिर उस्सी से पैसे कमाना २१इन्च के टी.वी। पर चारो ओर से तस्वीरों पर लिखना भयानक वायलिन की खतरनाक आवाज़े और एक खतरनाक या सहमी हुई आवाज़ के द्वारा पुरी घटना का वर्णन यही रह गया है खबरिया चनलो पर ये लोग क्यो नही समझते की इससे किसी का मानसिक सनुलन खो सकता है इन भयानक हमलो में जिन्होंने अपने लोगो को खोया है वो तो जीते जी ये सब देखकर मर जायेंगे. ये हमला हमारी हार था,इस हार ने हमारी कारगिल पर जीत को भुला दिया.आज तक किसी ने भी यह स्वीकार नही किया की ये हमारी गलती के कारण हुआ जब तक हममे स्वीकार की प्रवृत्ति नही आएगी हमपर हमले होते रहेंगे.
जय हिंद ....
nice
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