बुधवार, 28 अक्टूबर 2009

मुखौटा दिखा रहे है माओवादी......

सर्वप्रथम में उन लोगो से क्षमा मांगता हु जिनको मेरी लिखी पसंद है और मैंने लिखना बंद कर दिया था.क्योंकि मेरी भी एक जिद थी की जब तक कोई मेरे ब्लॉग पर टिपण्णी नही करेगा मई अपनी उंगलिया की बोर्ड पर नही दौड़आऊंगा.अब जब टिप्पणी काफी पहले हो गई थी पर मैवो देख न सका और आज मै फिर अपनी उंगलिया हिन्दी मै की बोर्ड पर दौड़ा रहा हु।
कई घटनाये घाट गई जैसे नक्सली हमले, महंगाई वृद्धि,जसवंत जी का निष्कासन, चुनाव इत्यादि...... परन्तु सबसे दुखद घटना मेरे हिसाब से जम्मू व कश्मीर क मुख्यमंत्री श्री उमार अब्दुल्लाह का इस्तीफा देना था यह हमारी राजनीति का कला दिन था भगवान् का लाख लाख शुक्र है की वो अब अपना काम आराम से कर रहे है भगवान उनको बुरी नीयत और नज़र दोनों से बचाए।
पर हम आज मे जीते है कल इसी समय ४०० के करीब लोगो की जान खतरे मे थी और हमेशा की तरह हमारे मंत्रीगण राजनीति कर रहे थे वो तो मूवादी ओना मुखौटा दिखने आए थे तो गनीमत है वरना कल तो विनाश का नया अध्याय प्रारम्भ होता।
जबसे भारत व नक्सल प्रभावित राज्यों ने हल्ला मचाया है की अब नक्सलियों को मुहतोड़ जव्वाब देंगे तब से नक्सली हमारा ही मुह तोड़ रहे है। हमेशा की तरह सरकार की कछुआ गति से होने वाला काम नक्सलियों को taiiyari का पुरा मौका दे रहे है। और बयां पे बयां आ रहे है जैसे ''अब वक्त हो गया है की उन लोगो को मुह तोड़ जवाब दिया जाए''और ''हम अपने लोगो पर आक्रमण नही करेंगे'' अब यही सुनना रह गया था कौन से अपने लोग वाही जो निर्दोष आदिवासी नेताओ नागरिको व पुलिस तथा सेना के जवानो ki hatya kar r ahe hai . yadi inhe apne logkahte hai to unka kya jo hatya kar dete hai aur unhe sazphansi k roop mai hoti hai vo bhi to hamare apne hai unhe saza kyo inhe kyo nahi. yah sab hamari kachua chaal va durdarshita na hone ka natija hai .ab to samay haath se nikl chuka hai jab sarkaar ne aar paar ki ladai ka melaan kiya to ye haal hai sahi jab ladai hogi to.....................
hme ye katai nahi bhulna chahiye ki ye log deshdrohi se kam nahi hai inke kaaran hamari jantaa ka 900 crore swaha ho gaya ya hone valla hai maaovadiyo ne na vikaas hone diya aur na hi vo aisa nahi hone dena chahte hai
आज ट्रेन रुकवाई है कल हवाई जहाज पर कब्जा करेंगे और हम देखते रहेंगे मे छत्तीसगढ़ निवासी हु और यहाँ पर जवान आ चुके है वे अभी जंगल मे रहने का अभ्यास कर रहे हैऔर जो जंगल मे है वो नक्सलियों के साथ साथ बीमारियों से भी लड़ रहे है कल ही ४ जवानो को हेलीकॉप्टर से राजधानी रायपुर लाया गया क्योकि उन्हें मलेरिया हो गया था.राज्य सरकार और दुसरे गैर सरकारी sangthano के पास इनकी सुरक्षा का कोई प्रबध नही दिख रहा है
हम नक्सलियों की मानव शक्ति को आसानी से ख़त्म कर सकते है पर उनकी दिमागी सोच और विचारधारा को फैलने से रोकना बहुत कठिन है.पिछले साल भर से यही सुन रहा हु की अब बहुत हो गया अब हम इन्हे नही बख्शेंगे पर अब हालत ये है की वो हम नही बख्श रहे है.पहले यहाँ फाॅर्स बरसात मे आने वाली थी, फिर हुआ की बरसात के बाद ,फिर हुआ की दिवाली के बाद बी.एस .ऍफ़.भी आएगी, फिर हुआ की nvamber के aakhri सप्ताह मे, अब हुआ है की द्सेम्बेर के पहले सप्ताह मे और फाॅर्स आएगी। हलाकि अभी आइ.टी .बी पि. के जवान आगये है गनीमत है आ तो गए अब देखे बाकी कब आयेंगे
अंत मे यही की शायद अब मे अपने राज्य मे विकास की गंगा बहते देख सकता हु ????
कुछ तकनीकी समस्या की वजह से अंग्रेज़ी मे भी टाइप हो गया है कृपया इसके लिए मुझे क्षमा करे
जय हिंद .....